Sulochana verma “Chaay” series

युवा कवयित्री सुलोचना वर्मा की “चाय” सीरिज की कविताएँ | सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत,विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और ब्लॉग में रचनाएँ प्रकाशित, बांग्ला से हिन्दी अनुवाद भी किए हैं| इन दिनों (चाय बागान) नहीं तोड़ती एक कलि दो पत्तियाँ कोई लक्ष्मी इनदिनों रतनपुर के बागीचे में अपनी नाजुक-नाजुक उँगलियों से और देख रहा है कोई जुगनू टेढ़ी आँखों से बागान बाबू को, लिए जुबान पर अशोभनीय शब्द सिंगार-मेज के वलयाकार आईने में उतर रही हैं जासूसी कहानियाँ बागान बाबू के घर दोपहर की निष्ठूर भाव -भंगिमाओं में नित्य रक्त रंजित…

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