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तुम्हारे बाद (क्षणिकाएँ) Poem by Sulochana Verma

युवा कवयित्री सुलोचना वर्मा की “तुम्हारे बाद (क्षणिकाएँ)” कविताएँ | सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत,विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और ब्लॉग में रचनाएँ प्रकाशित, बांग्ला से हिन्दी अनुवाद भी किए हैं| तुम्हारे बाद (क्षणिकाएँ) —————————- 1. बाद तुम्हारे स्मृतियाँ रहती हैं तो रहे मार्च महीना और पपीहा पिहू पिहू कहे 2. देकर दर्द बेइन्तेहाँ तोड़ा बेआवाज सुर ही कैसे सधे जब टूटा दिल का साज 3. नैनों से रूठे नैना न ही मिलन, न ही चैना 4. मैं बदली, गुजरी थी तलैया ऊपर थे अक्स तुम, मैंने पानी समझा था मैं बरसी…

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Sulochana verma “Chaay” series

युवा कवयित्री सुलोचना वर्मा की “चाय” सीरिज की कविताएँ | सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत,विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और ब्लॉग में रचनाएँ प्रकाशित, बांग्ला से हिन्दी अनुवाद भी किए हैं| इन दिनों (चाय बागान) नहीं तोड़ती एक कलि दो पत्तियाँ कोई लक्ष्मी इनदिनों रतनपुर के बागीचे में अपनी नाजुक-नाजुक उँगलियों से और देख रहा है कोई जुगनू टेढ़ी आँखों से बागान बाबू को, लिए जुबान पर अशोभनीय शब्द सिंगार-मेज के वलयाकार आईने में उतर रही हैं जासूसी कहानियाँ बागान बाबू के घर दोपहर की निष्ठूर भाव -भंगिमाओं में नित्य रक्त रंजित…

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